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'हस्ताक्षर हैं पिता' – एक अद्वितीय काव्य संग्रह

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भूमिका   ('हस्ताक्षर हैं पिता' के लिए) पिता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि संपूर्ण त्याग, प्रेम और संरक्षण का प्रतीक हैं। वह हमारी ताकत, मार्गदर्शक और निःस्वार्थ शुभचिंतक होते हैं। ‘हस्ताक्षर हैं पिता’ मेरी भावनाओं की अभिव्यक्ति है, जिसमें 1,111 कविताओं के माध्यम से पिता के प्रति आदर, स्नेह और आभार को समेटने का प्रयास किया गया है। मेरे पिता न केवल जन्मदाता थे, बल्कि एक अद्वितीय संरक्षक भी थे, जिनकी प्रेरणा से यह संकलन संभव हुआ। यह पुस्तक केवल मेरी नहीं, बल्कि हर संतान की भावनाओं का प्रतिबिंब है, जिसने पिता का प्रेम और समर्पण दिल से महसूस किया है। यदि इस संग्रह की कोई भी कविता आपके हृदय में पिता के प्रति सम्मान और प्रेम को और गहरा कर सके, तो मैं अपने प्रयास को सफल मानूँगी। सादर , लता अग्रवाल विवरण पिता, केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि संपूर्ण समर्पण और निःस्वार्थ प्रेम का प्रतीक हैं। वे एक छाया की तरह हर कठिनाई से हमें बचाते हैं, एक दीपक की तरह अंधकार में राह दिखाते हैं, और एक मजबूत दीवार की तरह हर संघर्ष में हमारा संबल बनते हैं। इस महान अस्तित्व को शब्दों में समेट पाना असंभव तो है, लेकि...

आशीषी मनोभाव

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भूमिका   आओ! प्रति दिन को बना दें अवसर  हर्ष और उल्लास का  देखो तो कैसे रचा यह जाल प्रभु ने  अंतर्संबंध का कि  एक शिशु है आ रहा विदेश से भारत भू पर  तो रच दिया अभिनंदन गीत उसके नाम का। देखिए! पढ़िए और आनंद लीजिए एक ऐसी रचना का जिसको जिसके लिए रचा गया उसका समग्र आनंद वह तो नहीं लेकिन उसके संबंधी और रिश्तेदार अवश्य ले पाएंगे, लेकिन भला हो ब्लॉगर साइट का कि प्रस्तुत शब्दों को वह शिशु कभी भी अबोध से बड़ा होने के बाद स्वयं भी पढ़ पाएगा। आशीर्वादी मनोभाव प्रिंस शिशु ऋषि के अपने घर (भारत) आगमन पर उसका आशीर्वाद सहित स्वागत आज विदेश से शिशु मनोहर ऋषि देखो अपने घर आया।  प्यार भरा आशीष सभी से आज स्वयं उसने है पाया।  बाबा ओंकार द्युलोकी सूक्ष्म रूप धार कर आए, अर्जुन ऋषि पौत्र दोनों को आशीषों के बंडल लाए।। दादी अम्मा मधु आज तो नवल पौत्र लखकर हर्षाई। आशीषों की पावन बूंदें ऋषि पौत्र पर हैं बरसाईं। हेमंत देवना मम्मी पापा देखो कितने हैं हर्षाए,  अर्जुन और ऋषि पुत्रों को फिरते अपने कंठ लगाये।। बुआ वसुन्धरा विशाल संग में स्वयं ऋषि समभाव लिये है।  भैया विरा...