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शोधार्थी रूपाली वशिष्ठ का आत्म-परिचय

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यहाँ एक आत्म-चित्रांकन शैली में विस्तारित और प्रभावशाली "रूपाली वशिष्ठ का आत्म-परिचय" प्रस्तुत है, जिसे हर आयु वर्ग के पाठक अपनाकर आत्मिक जुड़ाव महसूस कर सकें: मैं रूपाली वशिष्ठ ✨ मेरी कलम मेरी पहचान ✨ "अक्षर जब भावना से मिलते हैं, तो शब्दों में आत्मा बसती है। और जब आत्मा बोलती है, तो वह समाज को प्रेरणा देती है।" मैं रूपाली वशिष्ठ, एक लेखिका, एक संवेदनशील मन और एक सतत साधिका हूँ, जो जीवन के अनुभवों को स्याही में पिरोकर जनमानस के हृदय तक पहुँचाने का प्रयास करती रही हूँ। ✍️ सृजन की यात्रा लेखन मेरे लिए केवल शब्दों का खेल नहीं, यह एक आंतरिक साधना है। मेरी लेखनी मेरे हृदय की आवाज़ है, जो भावनाओं को अर्थ देती है, अनुभवों को दिशा देती है और सोच को विस्तार देती है। मेरी लेखनी ने जब पहली बार आकार लिया, तो वह बनी – 📖 ‘लाखामंडल’ – जहाँ इतिहास और संस्कृति की सुगंध थी। 📖 फिर उड़े ‘भावनाओं के पंख’ – जो हर दिल की गहराइयों को छू सके। 📖 और अब ‘मेरी कलम से...’ – जो मेरे अंतर्मन का आईना है, मेरी आत्मा की प्रतिध्वनि है। 🌟 गौरव का पल यह मेरे लिए गर्व का क्षण था, जब मेरी पुस्तक ...

उपदेश वर्मा जी की "शून्य से सृजन की यात्रा

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आत्म-चित्रांकन डॉ. उपदेश वर्मा (प्राचार्य, राजकीय महिला महाविद्यालय,  नंगला काशी, धौलाना) शीर्षक: "शून्य से सृजन की यात्रा" मैं डॉ. उपदेश वर्मा हूँ – एक शिक्षक, एक योजनाकार और अब एक मार्गदर्शक के रूप में एक नई संस्था की नींव रखने का सौभाग्य मुझे मिला है। जब पहली बार यह समाचार मिला कि धौलाना के नंगला काशी में राजकीय महिला महाविद्यालय की स्थापना की जा रही है और मुझे उसका प्राचार्य नियुक्त किया गया है, तो हृदय में गर्व के साथ एक गहरी जिम्मेदारी की अनुभूति भी हुई। यह केवल एक भवन नहीं था, यह एक सपना था – ग्रामीण बेटियों की आंखों में पलते उजाले का सपना। ना पाठ्यक्रम थे, ना कक्षाएं, ना उपकरण, ना शिक्षक। पर था तो केवल दृढ़ संकल्प – एक ऐसा संकल्प कि "जहाँ कुछ नहीं है, वहाँ से कुछ महान शुरू हो सकता है।" मेरे पहले कदम भवन का निरीक्षण करते हुए मैंने ईंटों में भविष्य की संभावनाएँ देखीं। सुनसान गलियारों में छात्राओं की चहचहाहट सुनने की कल्पना की। तभी मन में दृढ़ निश्चय जगा  कि  "अब यह केवल एक नियुक्ति नहीं, यह एक मिशन है।" साथियों से संवाद डॉ. सचिन गौतम से पहला संवाद हु...

आत्म-चित्रांकन शशि जी का

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भूमिका मैं एक संवेदनशील हृदय, जिज्ञासु बुद्धि और समर्पित कर्मशीलता की प्रतीक हूँ। जीवन को सतही नहीं, गहराई से जीने में विश्वास रखती हूँ। शब्दों में आत्मा की अभिव्यक्ति खोजती हूँ और प्रतिदिन को एक नए अवसर की तरह स्वीकार करती हूँ और यदि मैं यहाँ स्वयं को अभिव्यक्त कर रही हूँ तो इसलिए क्योंकि मैं एक न रुकने वाला प्रयास हूँ, न थकने वाली सोच, और हर अंधेरे में उम्मीद की लौ बनकर जगमगाने का विश्वास रखती हूँ। डॉ. शशि नागर  🌸 शिक्षा, सेवा और संकल्प की प्रेरक कहानी 🌸 नमस्कार, मैं डॉ. शशि नागर , वर्तमान में दिल्ली सरकार में राजनीति विज्ञान विषय की लेक्चरार के रूप में कार्यरत हूँ। मेरी शैक्षणिक यात्रा में मैंने पाँच विषयों में परास्नातक (Post Graduation) तथा राजनीति विज्ञान में पीएच.डी. की उपाधियाँ अर्जित की हैं। इसके साथ ही मैं एक समाजसेविका , बिज़नेस वुमन , और पर्यावरण-संवेदनशील नागरिक के रूप में भी निरंतर सक्रिय हूँ। मैंने शिक्षा के क्षेत्र को केवल एक पेशे के रूप में नहीं, अपितु  एक मिशन के रूप में चुना है—एक ऐसा मिशन जो समाज से लिंग आधारित भेदभाव को मिटाने और महिलाओं को आत्...