उपदेश वर्मा जी की "शून्य से सृजन की यात्रा

आत्म-चित्रांकन

डॉ. उपदेश वर्मा

(प्राचार्य, राजकीय महिला महाविद्यालय, 

नंगला काशी, धौलाना)

शीर्षक: "शून्य से सृजन की यात्रा"

मैं डॉ. उपदेश वर्मा हूँ – एक शिक्षक, एक योजनाकार और अब एक मार्गदर्शक के रूप में एक नई संस्था की नींव रखने का सौभाग्य मुझे मिला है।

जब पहली बार यह समाचार मिला कि धौलाना के नंगला काशी में राजकीय महिला महाविद्यालय की स्थापना की जा रही है और मुझे उसका प्राचार्य नियुक्त किया गया है, तो हृदय में गर्व के साथ एक गहरी जिम्मेदारी की अनुभूति भी हुई।

यह केवल एक भवन नहीं था, यह एक सपना था – ग्रामीण बेटियों की आंखों में पलते उजाले का सपना।

ना पाठ्यक्रम थे, ना कक्षाएं, ना उपकरण, ना शिक्षक। पर था तो केवल दृढ़ संकल्प – एक ऐसा संकल्प कि "जहाँ कुछ नहीं है, वहाँ से कुछ महान शुरू हो सकता है।"

मेरे पहले कदम

भवन का निरीक्षण करते हुए मैंने ईंटों में भविष्य की संभावनाएँ देखीं।

सुनसान गलियारों में छात्राओं की चहचहाहट सुनने की कल्पना की।

तभी मन में दृढ़ निश्चय जगा  कि 

"अब यह केवल एक नियुक्ति नहीं, यह एक मिशन है।"

साथियों से संवाद

डॉ. सचिन गौतम से पहला संवाद हुआ – “हम एक नींव रखने जा रहे हैं, क्या आप तैयार हैं?”

डॉ. रामायण राम मुस्कराए – “गाँव की बेटियों के लिए अगर कक्षा बनानी है, तो हम खुद ईंट उठाएंगे।”

डॉ. रंजना, डॉ. संयम, डॉ. गौरव, डॉ. नितेश और डॉ. गौतम आनंद – ये सब एक एक कर साथ जुड़ते गए।

हर संवाद में उत्साह, हर बैठक में योजना और हर दिन एक नयी शुरुआत होती रही।

मैंने अपनेआप से कहा

"सुविधाएं नहीं हैं, तो नवाचार होगा।

विलंब है तो सहनशक्ति होगी।

और जहाँ छात्राएं होंगी, वहाँ शिक्षा होगी – यही मेरा व्रत है।"

मैंने प्रशासन से, अभिभावकों से, गाँव की चौपाल से संवाद किया।

"यह महाविद्यालय केवल दीवारों का ढांचा नहीं, यह आपकी बेटियों के भविष्य की चाबी है।"

लोगों की आँखों में विश्वास देखा – और उसी विश्वास ने मुझे अडिग रखा।

आज जब मैं कक्षाओं की ओर बढ़ते हुए छात्राओं की आँखों में आत्मविश्वास देखता हूँ, तो लगता है – मेरा प्रयास सफल हो रहा है।

हमारा ये कॉलेज एक शून्य से शुरू हुआ सफर है – पर आज यह संभावनाओं की एक जीवंत पाठशाला है।

मेरा उद्देश्य:

यह महाविद्यालय केवल डिग्रियाँ नहीं,

संवेदनशील नागरिक, आत्मनिर्भर बेटियाँ और विचारशील मानव निर्माण का केंद्र बने।

अंत में, मैं यही कहना चाहूँगा

"मैं कोई महापुरुष नहीं, बस एक उत्तरदायी कर्मयोगी हूँ,

जिसे नियति ने एक बीज सौंपा – और मैं उसे वृक्ष बनाने में लगा हूँ।

यह वृक्ष अब फल देगा, छांव देगा, और एक दिन इतिहास में अंकित हो जाएगा।"

नवाचारी


प्राचार्य टीम के साथ

डॉ. उपदेश वर्मा

प्राचार्य, राजकीय महिला महाविद्यालय, नंगला काशी

धौलाना, जनपद हापुड़ (उ.प्र.) 

पाठ्य उन्नयन व विस्तार

चैट जी.पी.टी. 

प्रस्तुति



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