'हस्ताक्षर हैं पिता' – एक अद्वितीय काव्य संग्रह
भूमिका
('हस्ताक्षर हैं पिता' के लिए)
पिता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि संपूर्ण त्याग, प्रेम और संरक्षण का प्रतीक हैं। वह हमारी ताकत, मार्गदर्शक और निःस्वार्थ शुभचिंतक होते हैं। ‘हस्ताक्षर हैं पिता’ मेरी भावनाओं की अभिव्यक्ति है, जिसमें 1,111 कविताओं के माध्यम से पिता के प्रति आदर, स्नेह और आभार को समेटने का प्रयास किया गया है।
मेरे पिता न केवल जन्मदाता थे, बल्कि एक अद्वितीय संरक्षक भी थे, जिनकी प्रेरणा से यह संकलन संभव हुआ। यह पुस्तक केवल मेरी नहीं, बल्कि हर संतान की भावनाओं का प्रतिबिंब है, जिसने पिता का प्रेम और समर्पण दिल से महसूस किया है।
यदि इस संग्रह की कोई भी कविता आपके हृदय में पिता के प्रति सम्मान और प्रेम को और गहरा कर सके, तो मैं अपने प्रयास को सफल मानूँगी।
सादर,
लता अग्रवाल
विवरण
पिता, केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि संपूर्ण समर्पण और निःस्वार्थ प्रेम का प्रतीक हैं। वे एक छाया की तरह हर कठिनाई से हमें बचाते हैं, एक दीपक की तरह अंधकार में राह दिखाते हैं, और एक मजबूत दीवार की तरह हर संघर्ष में हमारा संबल बनते हैं। इस महान अस्तित्व को शब्दों में समेट पाना असंभव तो है, लेकिन लता अग्रवाल जी ने अपनी लेखनी की शक्ति से इसे संभव कर दिखाया है।
'हस्ताक्षर हैं पिता' केवल एक कविता संग्रह नहीं, बल्कि पिता के प्रति अपार श्रद्धा, सम्मान और प्रेम का एक सजीव दस्तावेज़ है। 1,111 कविताओं का यह अनुपम संकलन, जो लगभग 1,500 पृष्ठों में समाहित है, दो खंडों में प्रकाशित किया गया है। यह विश्व का पहला और एकमात्र ऐसा संग्रह है, जिसमें किसी एक व्यक्ति द्वारा पिता पर इतनी विस्तृत कविताएँ लिखी गई हैं। यह केवल संख्या की दृष्टि से नहीं, बल्कि भावनाओं की गहराई और विचारों की उत्कृष्टता की दृष्टि से भी अद्वितीय है।
इस संग्रह की सबसे विशेष बात यह है कि यह मात्र कल्पना पर आधारित नहीं, बल्कि एक सजीव अनुभव से उपजी संवेदनाओं की अभिव्यक्ति है। लता अग्रवाल जी को इस विशाल काव्य-संग्रह की प्रेरणा उनके अपने पिता से मिली, जो न केवल उनके जीवन के मार्गदर्शक थे, बल्कि एक अनोखे संरक्षक (Unique Caretaker) भी थे। उनके पिता ने अपने कर्तव्यों को केवल सीमित जिम्मेदारियों तक नहीं रखा, बल्कि निःस्वार्थ प्रेम, त्याग और बलिदान के माध्यम से अपने बच्चों को संपूर्णता से संवारने का कार्य किया। उनकी यही महानता लेखिका के हृदय में इतनी गहराई तक अंकित हो गई कि यह एक विस्तृत काव्य रूप में प्रवाहित हो गई।
यह संग्रह केवल कविता-प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है जिसने कभी पिता की छत्रछाया में सुरक्षा, मार्गदर्शन और स्नेह का अनुभव किया है। यह हमें याद दिलाता है कि पिता केवल एक जीवनदाता नहीं, बल्कि हमारे हर सपने के आधार होते हैं। वे हमें जीना सिखाते हैं, गिरने पर सहारा देते हैं, और बिना किसी अपेक्षा के अपना संपूर्ण जीवन हमारे लिए समर्पित कर देते हैं।
'हस्ताक्षर हैं पिता' सिर्फ शब्दों का समुच्चय नहीं, बल्कि एक श्रद्धांजलि है, एक भावनात्मक यात्रा है, और एक संदेश है—कि पिता के योगदान को पहचानें, सराहें और उनके प्रति अपने प्रेम को खुलकर व्यक्त करें। लता अग्रवाल जी की यह कृति साहित्य जगत में एक मील का पत्थर है और निःसंदेह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
लोकार्पण कर मत




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