एक व्यक्तित्व, अनेक आयाम
एक व्यक्तित्व, अनेक आयाम
सृष्टि में कुछ ऐसे व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनका प्रभाव केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहता, वे समाज और राष्ट्र के लिए भी प्रेरणा बन जाता है। ऐसे ही एक आदर्श व्यक्तित्व थे शिक्षिका शालिनी के पूज्य पिता, जिनका जन्म 1 जून 1960 को ग्राम बघेरा में स्व. श्री भुर सिंह चौहान और माताश्री श्रीमती दाखा देवी के घर हुआ। धर्मपरायणता और कर्मयोग उनके व्यक्तित्व की मूल धारा रही।
उन्होंने अपने जीवन की प्रथम पारी 28 दिसंबर 1976 को भारतीय नौसेना में प्रवेश से प्रारंभ की। पनडुब्बी शाखा में रहते हुए उन्होंने 31 मई 1993 तक राष्ट्र की सुरक्षा और गौरव हेतु सराहनीय सेवाएँ प्रदान कीं। समुद्र की लहरों से टकराकर आगे बढ़ने की उनकी प्रवृत्ति उनके जीवन के साहस, अनुशासन और कर्मनिष्ठा की प्रतीक रही। उनका देशभक्त स्वभाव केवल वर्दी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में झलकता रहा।
नौसेना से सेवानिवृत्ति के पश्चात उन्होंने अपने जीवन की दूसरी पारी शिक्षा के क्षेत्र में प्रारंभ की। 9 दिसंबर 1996 को वरिष्ठ अध्यापक (अंग्रेज़ी) पद पर नियुक्त होकर उन्होंने विद्यार्थियों में न केवल भाषा का ज्ञान दिया, बल्कि आत्मविश्वास, आशा और जीवन-दृष्टि का संचार किया। हर कक्षा उनके लिए एक साधना थी और प्रत्येक छात्र उनके लिए एक उज्ज्वल भविष्य का वाहक। अपने 23 वर्ष 5 माह के शिक्षण काल में उन्होंने अनेक विद्यार्थियों का भविष्य संवारते हुए, 31 मई 2020 को प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त होकर इस यात्रा को पूर्ण किया। इस प्रकार उनका कुल सेवाकाल 40 वर्ष 11 माह का रहा, जो स्वयं में एक प्रेरक गाथा है।
सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका जीवन रुका नहीं। उन्होंने तीसरी पारी आदर्श विद्या निकेतन माध्यमिक विद्यालय, बघेरा के संरक्षक के रूप में प्रारंभ की, जहाँ शिक्षा के क्षेत्र में उनकी दूरदृष्टि और समर्पण और भी अधिक स्पष्ट हुआ। उनके लिए शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं थी, बल्कि बच्चों के भीतर उजियारा जगाने का साधन थी।
सामाजिक और धार्मिक जीवन में भी वे उतने ही सक्रिय रहे। वे माँ ब्रह्माणी के अनन्य भक्त थे और श्री ब्रह्माणी माता विकास समिति के संरक्षक पद पर रहते हुए गाँव और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। राजनीति में रहते हुए भी उन्होंने ईमानदारी और सत्यनिष्ठा को सर्वोपरि रखा। भाजपा के ब्रह्माणी माता मंडल में मीडिया प्रभारी के रूप में उन्होंने राजनीति को समाज-सेवा का माध्यम बनाया, न कि स्वार्थ या सत्ता का साधन।
व्यक्तिगत जीवन में वे जितने दृढ़ और कर्मठ थे, उतने ही कोमल और संवेदनशील भी। एक आदर्श पिता, जीवनसाथी, भाई, ससुर, दादा और नाना के रूप में उन्होंने अपने प्रत्येक रिश्ते को गरिमा, स्नेह और आत्मीयता से निभाया। उन्होंने परिवार के पालन-पोषण से लेकर सामाजिक उत्तरदायित्वों तक हर जिम्मेदारी का निर्वहन बखूबी किया। उनकी मुस्कान जीवन जीने का संदेश देती थी और उनका सान्निध्य परिवार के लिए सुरक्षा, विश्वास और प्रेरणा का आधार था।
वे एक कर्मठ, सत्यनिष्ठ, ईमानदार, मिलनसार, सहयोगी, समय के पाबंद और मृदुभाषी व्यक्तित्व थे। "कर्म ही पूजा है" सिद्धान्त को उन्होंने जीवन में आत्मसात किया। यही कारण है कि संपूर्ण जगत उन्हें एक सच्चे देशभक्त, विद्वान, कर्मनिष्ठ समाजसेवी और आदर्श व्यक्तित्व के रूप में याद रखेगा।
आज वे शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनकी स्मृतियाँ, उनके आदर्श और उनकी शिक्षाएँ सदैव जीवित रहेंगी। उनका जीवन हम सबको यह प्रेरणा देता है कि साहस, ज्ञान, सत्य और प्रेम के साथ जिया गया जीवन ही वास्तविक अमरत्व प्राप्त करता है।
हम अपने पूज्य पिता को शत-शत नमन करते हैं।
ईश्वर उनकी पुण्य आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और हम सबको उनके दिखाए मार्ग पर चलने की शक्ति दें।
आइडिया 💡
शालिनी चौहान (पुत्री)
पाठ्य उन्नयन एवं विस्तार




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