राखी का धागा
राखी का धागा
कलाई पर बँधता है धागा,
पर रिश्ता दिल में बँध जाता है,
एक छोटी-सी राखी से
पूरा बचपन लौट आता है।
वो रूठना, फिर मान जाना,
बिन बातों के सब कह जाना,
थोड़ी-सी मेरी शरारत पर
तेरा चुपके से मुस्कुराना।
समय भले ही दूर ले जाए,
रास्ते कितने बदल जाएँ,
भाई-बहन के इस रिश्ते में
फिर भी मौसम कहाँ बदल पाएँ।
राखी केवल पर्व नहीं है,
ये बचपन की मीठी याद है,
भाई की कलाई पर बहन का
स्नेह भरा एक वादा है।
न माँगूँ मैं महँगे उपहार,
न चाहूँ कोई बड़ी निशानी,
बस यूँ ही बना रहे जीवन में
मेरे भाई, तेरी मेहरबानी।
जब दुनिया थोड़ी कठिन लगे,
जब मन कहीं घबराने लगे,
तेरा होना ही काफी है,
दिल फिर खुद को समझाने लगे।
रक्षा का अर्थ सिर्फ इतना नहीं—
कि भाई बहन की रक्षा करे,
बल्कि दोनों एक-दूजे के
हर सुख-दुख में साथ खड़े।
राखी का ये पावन धागा
उम्र की सीमा जानता नहीं,
भाई-बहन का सच्चा रिश्ता
कभी पुराना होता नहीं।
कलाई पर धागा छोटा है,
पर भाव बहुत विशाल है,
मेरे भाई, तू पास रहे या दूर—
तेरा होना ही मेरा विश्वास है।







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